ऋतुएँ

हम ऐसे देश में रहते हैं जिसमें कई तरह की ऋतुएँ आती हैं । हमें उन्हीं के हिसाब से अपने आप को बदलना पड़ता है । जैसे गर्मी में ठंडक देने वाली वस्तुएं धारण करना नहीं तो गर्मी का ताप कैसे सहेंगे । सर्दी में गर्म वस्तुएं धारण करना नहीं तो हम सर्दी का सामना नहीं कर पाएंगे । वर्षा काल में छाते का प्रयोग करना नहीं तो हम वर्षा से कैसे बचेंगे ।

वैसे ही इस जीवन में भी भिन्न-भिन्न स्वभाव के लोग मिलेंगे। वह कभी आपके स्वभाव के अनुसार नहीं बदलेंगे इसलिए उन पर अपनी ऊर्जा खर्च करने से पहले उनके स्वभाव को परखे और सोचे अपनी आत्मीयता को खत्म करे बगैर कैसे उनका सामना करें। दूसरों को बदलने के कारण हम अपनी बहुत सारी सकारात्मक शक्ति नष्ट कर देते हैं । हमें इस बात पर विचार करना चाहिए कि हम उनके अनुसार कैसे अपने आप को ढाल सकते हैं ।हम अपने दो बच्चों के साथ भी एक जैसा व्यवहार नहीं कर सकते क्योंकि दोनों के सभाव अलग हैं और उन्हें उनकी प्रकृति के हिसाब से ही समझाना चाहिए।

हमेशा हमें अपने विकास पर ही ध्यान देना चाहिए । हम विकसित होंगे तभी किसी को विकसित कर पाएंगे । हवाई जहाज में भी यही निर्देश दिए जाते हैं कि पहले ऑक्सीजन मास्क खुद लगाएं फिर किसी दूसरे की सहायता करें । अगर आपकी बात में सत्यता है तो दूसरे आप का अनुसरण जरूर करेंगे।


Seasons

We live in a country that has many seasons. We have to change ourselves according to the season. For example, to tolerate the heat during the summer we have to take cold things. We need to wear warm clothes in winter, otherwise, we will not be able to face the cold. If we don't use umbrellas in the rainy season then how can we avoid the rain?

Similarly, people of different nature will also be found in this life. They will never change according to your nature, so before spending your energy on them, test your nature and think about how to face them without exhausting your energy. Trying to change others destroys a lot of positive energy in ourselves. We should consider how we can mould ourselves according to them. We cannot treat our two children the same as both have different feelings and should be explained according to their nature.

We should always focus on our development. If we are developed then only we can develop someone else. The same instructions are also given in aeroplanes, that first wear oxygen masks then help someone else. If you are honest & confident then others will definitely follow you.


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