अंतर्द्वंद

आज जीवन में हमारी सबसे बड़ी लड़ाई अपने मन से है। हमारे मन में अच्छे बुरे बहुत से विचार आते हैं परंतु हमें उस से डरना नहीं चाहिए । कोई भी विचार आपके मन में आए तो उस पर प्रतिक्रिया करने से पहले खुद विचार कर ले। विचार लहरों की तरह होते हैं जो आते और जाते रहते हैं परंतु मन में वही विचार ठहरना चाहिए जो अंतर्द्वंद के बाद जीत जाए । अंतर्द्वंद से मतलब है अच्छे बुरे की ,सत्य असत्य की ,भय की,अहंकार की ,सकारात्मक और नकारात्मक विचारों में युद्ध ।अगर इस युद्ध में आपने सही मार्ग चुना तो आप जीत गए नहीं तो अपने को हारा समझे क्योंकि वास्तविक जीवन में जब तक हम इनका प्रयोग नहीं करते तब तक इनका कोई महत्व नहीं होता

हमारे मन में ही ईर्ष्या, द्वेष ,काम ,क्रोध लोभ जैसे राक्षस बैठे हैं। इनकी अपने हृदय से सफाई करने के लिए बार-बार अपने आप से प्रश्न करें या किसी सकारात्मक विचार को दृढ़ता से पकड़े रहे । एक अंतिम उपाय राम नाम का स्मरण ।यह कभी आपको गिरने नहीं देता और हारने नहीं देता जैसे अशोक वाटिका में सीता जी अनेक राक्षस राक्षसी से घिरी हुई थी सिर्फ अकेले राम नाम के जाप ने उन्हें वह कठिन समय व्यतीत करने का साहस दिया वैसे ही आपको सोचना है कि आपको अपने अंदर के इन मैलों को धोने के लिए कौन से साबुन का इस्तेमाल करना है।


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